लखीमपुर खीरी जिले के बलरामपुर ग्रुप की कुंभी चीनी मिल में लगने वाली PLA यूनिट जिसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है. खीरी पहुंचे सीएम योगी ने एक बार फिर से उसका जिक्र किया तो फिर लोगों के जुबान पर देश की इस पहली इंडस्ट्री का नाम आ गया. आखिर क्या है ये यूनिट, आसान भाषा में समझिए !

कुम्भी चीनी मिल (लखीमपुर खीरी) में स्थापित की जा रही PLA (Polylactic Acid) यूनिट असल में पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की प्लास्टिक जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया एक बड़ा कदम है। बलरामपुर चीनी मिल ग्रुप की तरफ से लगने वाली इस मिल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले की पहचान होगी, और कई अन्य इकाइयों को भी भविष्य में यहां पर आने की संभावना है.
इसे सरल भाषा में इस प्रकार समझा जा सकता है:
1. PLA क्या है?
PLA का मतलब है Polylactic Acid। यह एक ऐसा पदार्थ है जो दिखने और काम करने में बिल्कुल प्लास्टिक जैसा होता है, लेकिन यह पेट्रोलियम से नहीं बल्कि मक्के के स्टार्च या गन्ने के रस (शुगर) से बनाया जाता है। इसे ‘बायो-प्लास्टिक’ भी कहते हैं।
2. कुम्भी चीनी मिल में इसकी अहमियत
आमतौर पर चीनी मिलों में गन्ने से सिर्फ चीनी और एथेनॉल बनाया जाता है, लेकिन कुम्भी मिल में लग रही यह यूनिट गन्ने के रस या उससे निकले ‘इंटरमीडिएट’ उत्पादों का उपयोग करके PLA का कच्चा माल तैयार करेगी।
- इको-फ्रेंडली: चूँकि यह गन्ने से बनता है, इसलिए यह पूरी तरह से Biodegradable (मिट्टी में गलने वाला) होता है।
- प्लास्टिक का विकल्प: इसका उपयोग सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर कप, प्लेट, पैकिंग मटेरियल और मेडिकल उपकरणों में किया जा सकता है।
3. मुख्य फायदे
- किसानों को लाभ: गन्ने की खपत के नए रास्ते खुलने से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर और स्थिर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ती है।
- प्रदूषण में कमी: पारंपरिक प्लास्टिक हजारों सालों तक खत्म नहीं होता, जबकि PLA से बने उत्पाद जल्दी खाद में बदल जाते हैं।
- औद्योगिक विकास: उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में इस तरह की अत्याधुनिक तकनीक का आना क्षेत्र को इंडस्ट्रियल हब के रूप में पहचान दिलाता है।
संक्षेप में, यह यूनिट गन्ने से ‘हरा सोना’ (ग्रीन प्लास्टिक) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत है।





