लखीमपुर खीरी के बिजुआ ब्लॉक में आदर्श शिक्षक गोला गौरव जैसे सम्मान हासिल करने समेत तमाम सामाजिक संगठनों के सरोकार बाजपेई जी नहीं रहे. एक दिन पहले तक सामान्य नजर आ रहे दिवंगत शिक्षक शेषदत्त बाजपेयी को शनिवार की सुबह दिल की परेशानी हुई, उन्हें उनके पैतृक गांव बिजुआ से लेकर जिला अस्पताल तक दिल की बीमारी के इलाज के लिए ले जाया गया। लेकिन जिले पर कोई भी विशेषज्ञ हृदय रोग डॉक्टर ना होने से उनका सफर सीतापुर के पास खत्म हो गया. हाल ही में विधायक अरविंद गिरि के आकस्मिक निधन पर काफी व्यथित थे,

अब्दुल सलीम खान
लखीमपुर खीरी। (The_Up_Top_Voice). यूपी के लखीमपुर खीरी में हाल ही में जिस विद्यालय को यूपी के बेस्ट स्कूल से सम्मानित किया गया था उस स्कूल के संस्थापक शिक्षक रहे शेषदत्त बाजपेई का शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. हाल ही में गोला विधायक अरविंद गिरी के हृदयाघात से हुए निधन के बाद से बाजपेई जी काफी व्यथित रहते थे, और अचानक वह भी हृदयरोग से ही इस दुनिया से चल बसे.

शेषदत्त बाजपेयी खीरी जिले के बिजुआ के रहने वाले थे, 40 साल वो सरकारी स्कूल में शिक्षक रहे, और कई बार सहकारी समिति के अध्यक्ष भी रहे, मौजूदा समय मे बिजुआ किसान सहकारी समिति के अध्यक्ष भी थे.
तहसील में गोला गौरव से हो चुके सम्मानित

दिवंगत शेषदत्त बाजपेयी 2016 में तत्कालीन तहसीलदार आशुतोष गुप्ता (वर्तमान एसडीएम पूरनपुर) ने तहसील के विभिन्न क्षेत्रों से 16 बेहतरीन कार्य करने वालों को सम्मानित किया था, उनमें शिक्षा के लिए कार्य करने पर इन्हें गोला गौरव से सम्मनित किया था. रिटायर होने के बाद से वो सामाजिक संगठनों में हिस्सा लेना तेज कर दिया था.
बेसिक शिक्षा विभाग ने आदर्श शिक्षक चुना था बाजपेयी जी को
दिवंगत शिक्षक शेषदत्त बाजपेई को बेसिक शिक्षा विभाग में 2015-16 में बिजुआ ब्लॉक का आदर्श शिक्षक चुना था, वह लगातार न्याय पंचायत संसाधन केंद्र के प्रभारी रहे। और प्राथमिक विद्यालय बझेड़ा में शिक्षक रहे । उस समय बझेड़ा गांव तक जाने के लिए कोई शिक्षक तैयार नहीं होता था, दरअसल नदी की धार सड़क और गांव के बीच मे थी। वहां कोई स्कूल नहीं था झोपड़पट्टी में शिक्षा का संचालन चल रहा था, बाजपेई जी ने एक बार बातचीत के दौरान बताया कि वह स्कूल निर्माण के दौरान साइकिल और डनलप से सीमेंट की बोरी ले जाकर तब स्कूल का निर्माण करवाया था ।
आज वही बझेड़ा का स्कूल यूपी का उत्कृष्ट स्कूल बन चुका है, और वहां के मौजूदा शिक्षक वीरेंद्र शुक्ला को हाल ही में उत्तर प्रदेश शासन ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया है,





