कांग्रेस के पूर्व सांसद जफर अली नकवी ने बजट को लेकर खोलकर रख दी अर्थव्यवस्था की पोल

कांग्रेस के पूर्व सांसद और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जफर अली नकवी ने मोदी सरकार के बजट को बीजेपी का चुनावी बजट करार दिया उन्होंने कहा कि अगर यह मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए बजट होता तो मनरेगा का बजट कम न किया गया होता और शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस रखते हुए बजट प्रस्तुत होता पूर्व सांसद मंत्री रहे जफर अली नकवी ने The यूपी Top Voice से विस्तृत बात की.

टीम डिजिटल (Theuptopvoice)। ‘ सब कुछ तो महंगा है, आटा, दाल, तेल, गैस और सब्जियां…. फिर कहां रखा है गरीबों का ध्यान इस सरकार ने’….यहां तक की । मनरेगा का बजट ₹38,468 Cr कम कर दिया। तो ग़रीबों का क्या होगा ? – जफर अली नकवी,

खीरी के पूर्व सांसद और मंत्री जफर अली नकवी

भाजपा सरकार का बजट जनता का, भाजपा पर लगातार गिरते विश्वास का सबूत है । ये केवल चुनाव को ध्यान रखकर बनाया बजट है, देश को ध्यान में रखकर नहीं। इस बजट में बेरोज़गारी का हल ढूंढ़ने की कोई भी कोशिश नहीं की है। अपने चरम पर महँगाई है, आम इंसान की रोज खर्चे की भरपाई पूरी करने में आफ़त आई है। बजट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे रोज़मर्रा की वस्तुओं के दामों में कोई भी कमी आये। आटा, दाल, दूध, रसोई गैस – सबका दाम बढ़ाकर मोदी सरकार ने देश को लूटा है। इस बजट में दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए कुछ भी नहीं है। उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए एक भी क़दम नहीं है। मनरेगा का बजट ₹38,468 Cr कम कर दिया। तो ग़रीबों का क्या होगा ?
शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में कोई बढ़ावा नहीं है। कमी है।
किसान विरोधी, भाजपा सरकार ने किसानों के लिए बजट में कुछ नहीं दिया है। 2022 में किसानों की आय डबल करने का वादा किया था, उसको पूरा क्यों नहीं किया ?
MSP गारंटी कहाँ है ? किसानों की अनदेखी चालू है। बैंकिंग सेक्टर को भाजपा सरकार ने बर्बाद कर दिया है। भगौड़े देश लूट कर भाग गए हैं ! 3 लाख करोड़ के Wilful Defaulters हैं। बैंकों पर 36 लाख करोड़ का NPA Slippage है। पर बजट में कोई उपाय नहीं बताया गया है। SBI और LIC को जो जोखिम में डाला जा रहा है, उसपर एक शब्द नहीं है।
कुल-मिलाकर भाजपा सरकार ने —देश की जनता का जीवन दुश्वार किया है। देश की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुँचाई है।
देश की संपत्ति को लूटने के अलावा मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया है। इस बजट को ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे बजट’ कहेंगे।

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