
डॉ राम लखन सिंह सिर्फ दुधवा के निदेशक ही नहीं रहे, वह मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक व वन संरक्षक उत्तर प्रदेश भी रहे हैं . लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में वह दुधवा में डायरेक्टर के कार्यकाल के दौरान रहे थे. जब बिली अर्जन सिंह और उनकी टाइग्रेस तारा को लेकर दुधवा अफसरों खास करके राम लखन सिंह के बीच अफसरी जंग छिड़ी थी. उसके बाद मुलायम सरकार से खिलाफत के बाद जेल जाना और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए जाना जाता है.

टीम डिजिटल (theuptopvoice) . दुधवा नेशनल पार्क के निदेशक, चिड़ियाघर के निदेशक समेत तमाम अहम पदों पर रहने वाले 1969 बैच के आईएफएस अफसर डॉक्टर राम लखन सिंह का सोमवार को सुबह निधन हो गया. उनके पुत्र सिद्धार्थ सिंह ने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी. वो लखनऊ में राय बरेली रोड पर अपने आवास पर रह रहे थे. सूचना मिलते ही वन महकमे समेत वन्य जीव पर्यावरण प्रेमियों में शोक फैल गया।
डॉ. राम लखन सिंह आज तक के सबसे चर्चित आईएफएस अधिकारी रहे हैं. उन्होंने वन्य जीवों को लेकर किताबें लिखी हैं। ‘ मेरी न्याय यात्रा’ नामक किताब में राम लखन सिंह ने लिखा है कि जब वो मुख्य वन संरक्षक बनाए गए थे, कैसे सपा सरकार में साल 2003 में उनकी और तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बीच ठन गई थी. इस बीच उन पर तीन मुकदमे लिखे गए, और आखिरकार उन्हें जेल भी जाना पड़ा. 10 दिन तक जेल भी रहे, और कई साल तक लंबी अदालती लड़ाई लड़ने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ मिला. सपा सरकार में साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 लाख मुआवजा दिया गया. सुप्रीम कोर्ट में इस बात को इस बात को साबित करने में सफल रहे कि उन्हें सरकार की बात न मानने पर प्रताड़ित किया गया.
दुधवा में बिली अर्जन सिंह की पालतू बाघिन तारा को लेकर चर्चा में रहे थे डॉक्टर सिंह

दुधवा के फाउंडर कहे जाने वाले बिली अर्जन सिंह साल 1976 में इंग्लैंड के चिड़ियाघर से बाघिन बच्ची लाए थे. उसे अपने आवास टाइगर हेवेन पर बिली ने पाला, जो साल 1980 तक आते आते वो दुधवा के जंगल में रच बस गई तारा टाइगर हैव नाती और फिर जंगल चली जाती इस बीच दुधवा में एक आदमखोर बाघ लगातार लोगों को मार रहा था. तब के दुधवा डायरेक्टर डॉक्टर राम लखन सिंह इस बात बिली से उलझ गए थे, कि तारा ही आदमखोर हो चुकी है, जिसे बिली बिल्कुल मानने को तैयार नहीं थे. उधर दुधवा प्रशासन ने तारा के सिर पर 24 खून का आरोप लगाकर शूट ऑर्डर करा लिया था. इसी बात को लेकर बिली अर्जन सिंह और डॉक्टर राम लखन सिंह के बीच ठन गई थी। और तारा को सजा मौत दी गई थी।





