लखीमपुर के पलिया की बजाज चीनी मिल में गाजीपुर बॉर्डर सा नजारा

– किसान आंदोलन को लंबा ले जाने के मूड में हैं, वो कह रहे हैं कि अब लड़ाई जीतने तक लड़ते रहेंगे, यहां तम्बू लगी ट्रालियों का यहां भी लगा जमवाड़ा लगना शुरू हो गया है।

लखीमपुर के पलिया की बजाज चीनी मिल में धरना स्थल पर पहुंच रही तम्बू वाली ट्रालियां
बजाज चीनी मिल के धरने में शामिल होने के लिए तैयार हो रही एक तम्बू वाली ट्राली।
धरना स्थल पर मौजूद किसान।

अपना बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान लेने लिए लखीमपुर जिले के पलिया इलाके के किसानों ने पूरी तरह कमर कस ली, किसान कमर भी क्यों न कसे, यहां के किसानों की मुख्य फसल गन्ना है और उसी से मिलने वाली रकम ही उनके आर्थिक स्तर का आधार भी, पिछले सत्र में उन्होंने जो गन्ना बजाज चीनी मिल को दिया था उसका ही भुगतान अभी तक नहीं किया गया है और फिर मिल के नए सत्र की तैयारी कर दी गई लेकिन इस बार किसान इतना परेशान हो चुका था कि उसने पहले की गलतियों को दोहराने की बजाए आंदोलन का रास्ता चुना और सहकारी समिति को बंद कर मिल में ही धरना दे दिया है……अब वो तस्वीर साफ कर चुके हैं कि पहले बकाया भुगतान हो फिर उसके बाद नए सत्र की भी बात हो… अब यहां गाजीपुर बॉर्डर की तरह किसानों ने तैयारी कर दी है।

(The यूपी top voice) लखीमपुर/ पलियाकलां। रविवार को किसानों ने पलिया गन्ना समिति में ताला जड़ने के बाद चीनी मिल में धरना शुरू कर दिया था जो शुक्रवार को छठे दिन भी धरना जारी रहा। किसानों द्वारा मिल यार्ड में तंबू लगी ट्रालियां खड़ी कर दी गईं हैं। ताकि यहां आंदोलन की रफ्तार धीमी न पड़े और किसान रात दिन डटा रह सके। किसानों का कहना है कि बकाया भुगतान की मांग को लेकर गाजीपुर बार्डर की तरह यहां पर भी किसान डटा रहेगा और जब तक भुगतान नहीं होता है तब तक न तो यहां से हटेगा और न ही मिल को गन्ना दिया जाएगा।

एक नहीं दर्द बेशुमार…..

किसानों का बस कोई एक दर्द नहीं है बल्कि दर्द बेशुमार हैं। बकाया गन्ना मूल्य न मिलने किसानों को अपने बच्चों को खाना दे पाना मुश्किल है और स्कूल प्रबन्धन उन पर फीस का दबाव बना रहा , वहीं कई तरह के कर्जों की वसूली सरकारी गैरसरकारी लोग भी दबाव बना रहे हैं।

अपनी ही नहीं गोला की भी लड़ेंगे लड़ाई

पलिया के किसान अब अपनी लड़ाई तो लड़ेंगे ही साथ बजाज की गोला चीनी मिल परिक्षेत्र के किसानों को भी बकाया दिलाने को आवाज बुलंद करेंगे, किसानों का एक जत्था यहां से रवाना हुआ है और आगे भी किसान वहां जाकर आंदोलन का हिस्सा बनेगें।

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