नाम था कौशल्या, लेकिन हर एक के लिए पगली थी, लेकिन पुलिस के लिए परिवार का हिस्सा

(The_UpTop_Voice)-लखीमपुर खीरी । उत्तर प्रदेश पुलिस के इस चेहरे को देखना जरूरी है, जब खाकी किसी को अपना मान ले, तो उसके लिए एक अर्धविक्षिप्त भी कितना खास होता है, यह लखीमपुर खीरी के भीरा पुलिस के किरदार से देखने को मिला। एक अर्धविक्षिप्त बपैय्या उर्फ कौशल्या को पहले आसरा दिया, अचानक उसकी मौत हो जाने पर पूरे स्टाफ ने उसके अंतिम संस्कार में कांधा देकर अपना फर्ज निभाया। अब पुलिस ने उसकी तेरहवीं का आयोजन किया।

यहां दशक से एक अर्धविक्षिप्त महिला खीरी जिले के बिजुआ पुलिस चौकी पर रह रही थी । चौकी पुलिस की मेस में जो पकता था, उसमे एक खुराक उस पगली की भी होती थी। कपड़े, साबुन तक वहीं से मिलता था। उसे खाना कपड़े मिलते थे यहां तक कि त्यौहार साथ पुलिस और वह अर्ध विक्षिप्त महिला त्यौहार तक साथ मनाते थे जब राखी आती थी, तो पहली राखी उस पगली की भी होती थी। बीते 5 नवंबर दिवाली की रात वह अर्धविक्षिप्त कौशल्या (बपैय्या) अपने अस्थाई निवास पुलिस चौकी के बरामदे के कोने में अचानक चल बसी।
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- तेरहवीं का आयोजन कर निभाया परिवार का पर्व

भीरा पुलिस ने बपैय्या के अंतिम संस्कार में पूरे स्टाफ के साथ जाकर अर्थी को कंधा दिया और राखी का फर्ज निभाया। अब उसकी तेरहवीं संस्कार का आयोजन कर भीरा पुलिस ने परिवार का फर्ज निभाया है । शनिवार को भीरा थानाध्यक्ष अजय राय खुद मेजबान बने, चौकी इंचार्ज लल्ला गोस्वामी और स्टाफ ने अपने हाथों से भोजन परोसा।





