अमरीक सिंह का बेटा न आ सका, बेटियों ने चिता को दी आग,

प्रगतिशील किसान और पूर्व प्रधान अमरीक सिंह ‘बिट्टू भैया’, का बुधवार 3 बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनकी दोनों बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी.

लखीमपुर खीरी (Theuptopvoice)। 3 दिन से अपनों का इंतजार कर रहे अमरीक सिंह बिट्टू के शव का अंतिम संस्कार बुधवार को गांव पहुंची उनकी बेटियों ने किया. इकलौता बेटा विदेश से नही आ सका, मोबाइल पर वीडियो कॉल से अंतिम संस्कार को देखता रहा. इधर बहनें पिता को मुखाग्नि दी रहीं थीं, उधर सात समंदर पार बैठा भाई बेबसी से अपनी बहनों को वो फर्ज निभाते देख रहा था. जिस पिता को उसे कांधा देना था, वो पिता आज दूसरों के कांधे पर आखिरी सफर पर निकला.

शारदा नदी की तलहटी में बसे गांव की दूरी मुख्य मार्ग से भले 4 किमी हो, लेकिन गांव में घुसते ही शानदार कोठी और उसमे लगे लम्बे लम्बे पाम के पेड़ और सैकड़ों तरीकों के पौधों से सजा बगीचा बताता है कि इस घर में प्रकृति से प्रेम करने वाले रहते हैं, अमरीक सिंह बिट्टू का घर सभी सुख सुविधाओं से भरा था, खेती किसानी में उनका कोई सानी नहीं था. लेकिन भगवान ने उनके हिस्से में तमाम दुख लिखे थे, कम उम्र में बड़े भाई की असमय मौत हो गई थी, पिता कांग्रेसी नेता राजा हरभजन सिंह बड़े बेटे की मौत से टूट गए थे, ऐसे में कम उम्र में पूरी जिम्मेदारियों का बोझ आ आ गया था। चार दशक से इन्ही जिमेदारियों को पूरा करते करते उनकी पत्नी और पिता भी उन्हे छोड़कर मृत्युलोक चले गए.

दो बेटियां और एक एक बेटे को पाल पोस कर दोनों बेटियों i शादी कर दी थी. इकलौता बेटा अनमोल भी विदेश में पढ़ाई करके वहीं सेटल होना चाहता था, वो कनाडा में है.

इस घर में दो दशक तक बिजुआ ग्राम पंचायत की प्रधानी रही. अमरीक, उनकी माता और पत्नी ग्राम प्रधान रहीं। पिता भीरा गन्ना समिति के फाउंडर /डायरेक्टर सदस्य रहे। खुद अमरीक सिंह समिति डायरेक्टर और गन्ना विकास परिषद गुलरिया के फाउंडर अध्यक्ष थे. इतनी सामाजिक रुतबे वाले शख्स ने मौत का को रास्ता चुना उसके पीछे भी बड़ी वजह रही.

चर्चा है, नदी के किनारे की जमीन पर हुआ था 5 दिन पहले विवाद,

मृतक किसान के भांजे मनी ने बताया कि 5 दिन पूर्व उनके मामा के साथ आरोपियों ने तमाम लोगों के साथ मिलकर मारपीट की थी. इस बात का खुलासा मृतक के कमरे से मिले उनके कपड़ों और ग्रामीणों से जानकारी हुई। वही पुलिस ने मुकदमा लिखे जाने के बाद भी किसी को गिरफ्तार नही किया था। वहीं इस मामले में आरोपियों पर राजनैतिक संरक्षण मिलने का भी आरोप लगाया. पुलिस कारवाई न होने से परिवार एक लोग नाराज थे, पलिया विधायक के आश्वासन के बाद अंतिम संस्कार हो सका.

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